Breaking News in India in Hindi | Safe Blues Virus Bachayega Corona Sai

All India News 24 – Breaking News in India in Hindi | Safe Blues Virus Bachayega Corona Sai नमस्कार दोस्तों आज की खबर आपके लिए बोहोत ज़रूरी है यह मदद करेगा आपकी कोरोना वायरस से बचने और लड़ने में। वायरस का नाम सुनते ही किसी के भी दिमाग में एक ऐसी चीज़ की छवि बनती है जो नुकसान पहुंचाने वाली हो , लेकिन वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसा वायरस तैयार किया है जो कि लोगो की मदद कर रहा है कोरोना जैसे वायरस के बारे में ; ब्लूटूथ के ज़रिए काफ़ी तेज़ी से लोगों को अलर्ट कर देता है। इस खास वायरस को Safe Blues नाम दिया गया है और दावा है कि यह कोरोना ट्रैकिंग का काम बेहद ही सटीकता के साथ कर सकता है। वैसे आपको बता दें कि यह वर्चुअल वायरस है और इससे आपके स्मार्टफोन को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड , मेलबर्न विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( University of Queensland of America , University of Melbourne and Massachusetts Institute of Technology ) के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से इस वर्चुअल वायरस को तैयार किया है। इसे तैयार करने वाले शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस वायरस के ट्रांसमिशन के दौरान किसी भी यूजर का डाटा रिकॉर्ड नहीं होता है और ना ही किसी सर्वर पर कोई डाटा स्टोर होता है। यानी प्राइवेसी के मामले में भी ये बिलकुल सुरक्षित है। यह वायरस सटीकता के साथ बता सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन हो रहा है या नहीं। इसके अलावा भीड़ , समारोह आदि को भी यह ऑटोमेटिक ट्रैक करता है , यानी आपको बता देगा कि किस जगह भीड़ – भाड़ है। दिलचस्प बात ये है कि यह वायरस ब्लूटूथ के ज़रिए काम करता है। इसको कोरोना महामारी द्वारा पूरी दुनिया में कॉन्टेक्ट ट्रैसिंग के लिए तैयार किए गए सिस्टम के आधार पर ही तैयार किया गया है। आपको बता दें कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का उद्देश्य होता है लोगों को आगाह करना ताकि वे किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में ना पहुंचे और इस तरह से खुद भी इस वायरस को फैलाने से बचें। जानकार मानते हैं कि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बेहद अहम है। Breaking News in India in Hindi | Safe Blues Virus Bachayega Corona Sai किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसर उससे संपर्क करता है और पता लगाता है कि वह कहां गया और किन लोगों के आसपास रहा। ट्रेसर उन लोगों पर ध्यान देता है जो आम तौर पर व्यक्ति के इर्दगिर्द रहते हैं। इन लोगों को फिर सेल्फ आइसोलेट करने को कहा जाता है। इन लोगों को लक्षणों पर ध्यान देने को कहा जाता है और जरूरत पड़ने पर इनका टेस्ट भी किया जाता है। बता दें कि भारत सरकार ने कोरोना महामारी में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए आरोग्य सेतु एप को लॉन्च किया है , हालांकि अब इस एप का इस्तेमाल कोरोना वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के लिए भी हो रहा है। आरोग्य सेतु एप को करीब 17 करोड़ से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है और रेल यात्रा के दौरान , और कई सार्वजनिक जगहों पर इसका फोन में होना अनिवार्य है। जब से कोरोना वायरस ने पूरी दुनियां में दस्तक दी है , सबके मन में इसके प्रति एक अलग सा भय बन जाता है कि इंसान वायरस से जुड़ा कुछ भी सुनता है , तो इसी तरह की चीज के दृश्य उसके ज़हन में आने लगता है , जिससे उसे खतरा हो सकता है। लेकिन Safe Blues नाम का विकसित नया वायरस अलग है। दोस्तों , क्या आपको लगता है कि कोरोना ट्रैकिंग वाला Safe Blues वायरस ही दुनिया को कोरोना संक्रमण के कहर से बचा पायेगा , देश में दोबारा लॉकडाउन लगने से रोक पाएगा ? अपनी राय कमेंट करके ज़रूर बताइये धन्यवाद।
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University of Queensland of America
University of Melbourne and Massachusetts Institute of Technology

 

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