विश्व मानवाधिकार परिषद यूथ प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुली शराब की दुकानों को लेकर सौपा ज्ञापन

उरई/जालौन। जहाँ महामारी के चलते पूरे विश्व में लगातार मौतों और मरीजों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। लेकिन इससे बचाव के लिए अभी तक कोई GBकारगर सटीक दवा नहीं बन पाई है और अगर इससे बचना है तो आप स्वयं अपने व अपनों को घर पर ही रखें। जिससे संक्रमण की चैन को तोड़ा जा सके। लेकिन हाल ही में भारत सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था का हवाला देकर शराब की दुकानों को खोलने का निर्णय लिया गया। जो शायद सरकार के लिए यह फैसला सही हो पर जैसे ही यह निर्णय का पालन किया गया वैसे ही पूरे देश व प्रदेश में मानों को महामारी जैसी कोई गंभीर समस्या नहीं है। और शराब को चाह अपनी जान की परवाह न कर शराब की दुकानों पर सोशल डिस्टेंस की धज्जियाँ उड़ाते हुए पहले हम पहले हम की लड़ाई में एक दुसरे के ऊपर चढ़ते चले जा रहे हैं जोकि बहुत ही चिंतनीय विषय है। साथ इस महामारी को बढ़ावा देने का कार्य हो रहा है।

इसी क्रम में आज जनपद जालौन में विश्व मानवअधिकार यूथ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से ईडीएम को सौपा जिसमे उन्होंने बताया कि अभी तक लॉक डाउन 2 का यानी 3 मई तक लॉक डाउन का पालन तो सख्ती हुआ। मगर शासनादेश पर शराब के ठेके खोल दिए गये। इससे प्रदेश में और भी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। हो सकता है इस छूट से अपने राज्य उत्तर प्रदेश की विषम परिस्थिति में यह कदम भारी ना पड़ जाए। इसलिए विश्व मानवाधिकार परिषद आपसे मांग करता है। कि शराब के ठेके को बंद किया जाए और हो सके तो सख्ती से जैसे अभी तक चल रहा था वैसे ही आगे बंद रखने का प्रयास करें। जब तक प्रदेश से कोरोना वायरस का संक्रमण समाप्त न हो जाए। यदि शराब की दुकानें बंद नहीं की गई तो लोग सड़कों पर नजर आएंगे और संक्रमण फैलनी की संभावना कई गुना अधिक बढ़ जाएगी।